होम लोन प्रीपेमेंट कैलकुलेटर

आपका लोन

ये आँकड़े अपने लोन स्टेटमेंट या बैंक ऐप से लें।

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साल
प्रीपेमेंट शुल्क (फिक्स्ड-रेट लोन)
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RBI के अनुसार फ्लोटिंग-रेट होम लोन पर शुल्क आमतौर पर 0% होता है। फिक्स्ड-रेट पर 2–4% तक हो सकता है।

नतीजा नीचे दिखेगा ↓

नई अवधि — अवधि घटाने पर
EMI
ब्याज बचत
समय की बचत

तीनों विकल्प एक नज़र में

विकल्पमासिक EMIशेष अवधिकुल ब्याजब्याज बचत

प्रीपेमेंट सारांश

प्रीपेमेंट राशि
नया बकाया
मौजूदा EMI
प्रीपेमेंट शुल्क₹0

ब्याज

कुल ब्याज (अभी)
अधिकतम ब्याज बचत

बकाया मूलधन — समय के साथ

मूल बकायाप्रीपेमेंट के बाद

हरी रेखा दिखाती है कि प्रीपेमेंट के बाद आपका बकाया कितनी तेज़ी से घटता है।

पूरी अमॉर्टाइज़ेशन तालिका देखें (चुने हुए विकल्प की)
#ब्याजमूलधनबकाया
इस कैलकुलेटर का उपयोग कैसे करें
  1. अपने लोन का बकाया बैलेंस, ब्याज दर और शेष अवधि भरें।
  2. वह रकम डालें जो आप प्रीपे करना चाहते हैं।
  3. कैलकुलेट करें पर क्लिक करें और नई EMI, ब्याज बचत और तुलना देखें।
इस टूल के बारे में

बोनस, इंसेंटिव या कोई बड़ी रकम हाथ आई है? नीचे अपने लोन की जानकारी भरें और तुरंत देखें — प्रीपेमेंट करने पर EMI घटाएं या अवधि घटाएं, किसमें कितनी ब्याज बचत होती है, और आपके लिए कौन-सा विकल्प बेहतर है।

कैसे काम करता है

प्रीपेमेंट EMI और अवधि को कैसे बदलता है

जब आप मूलधन में एकमुश्त रकम जमा करते हैं, बकाया तुरंत घट जाता है। इसके बाद बैंक आपको दो विकल्प देता है — या तो EMI घटा दें, या अवधि।

मूलधन में जमा करें

बोनस, 13वां वेतन, FGTS जैसी बड़ी रकम सीधे principal में जमा करें। बकाया उसी दिन घटता है।

EMI घटाएं

अवधि वही रहती है, हर महीने की किस्त कम हो जाती है — मासिक नकदी में राहत।

अवधि घटाएं

EMI वही रखते हैं, लोन जल्दी खत्म होता है — आमतौर पर सबसे ज़्यादा ब्याज बचत।

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दर वही रहती है

प्रीपेमेंट से आपकी ब्याज दर नहीं बदलती — यह रीफाइनेंस/बैलेंस ट्रांसफर से अलग है।

EMI या अवधि?

EMI घटाएं या अवधि घटाएं — कौन बेहतर?

यह भारत में हर प्रीपेमेंट के साथ आने वाला सबसे बड़ा सवाल है, और इसका सीधा जवाब है: अगर लक्ष्य कुल ब्याज बचाना है, तो अवधि घटाना आमतौर पर ज़्यादा बचाता है। क्योंकि आपकी EMI वही रहती है, हर किस्त में ज़्यादा हिस्सा मूलधन में जाता है और लोन जल्दी बंद होता है।

दूसरी ओर, अगर हर महीने की जेब पर दबाव कम करना है — नौकरी बदलने, बच्चे के जन्म या किसी बड़े खर्च के दौरान — तो EMI घटाना समझदारी है। कुल बचत थोड़ी कम होगी, पर मासिक नकदी बढ़ जाएगी। ऊपर की तुलना तालिका दोनों नतीजे साथ-साथ दिखाती है ताकि आप सोच-समझकर चुनें, न कि डिफ़ॉल्ट पर।

नई EMI (EMI घटाने पर) = (बकाया − प्रीपेमेंट) × r(1+r)ⁿ ÷ [(1+r)ⁿ − 1]
जहाँ r = सालाना दर ÷ 12 · n = शेष किस्तें

अवधि घटाने पर EMI वही रहती है और नई अवधि तब तक घटती है जब तक बकाया शून्य न हो जाए।

ज़रूरी बात: बहुत-से भारतीय बैंक डिफ़ॉल्ट रूप से अवधि घटाते हैं। अगर आप EMI घटाना चाहते हैं तो यह स्पष्ट रूप से कहना पड़ता है। विस्तृत तुलना यहाँ पढ़ें →

शुल्क और नियम

प्रीपेमेंट शुल्क और RBI नियम

अच्छी ख़बर: RBI के दिशानिर्देशों के अनुसार फ्लोटिंग-रेट होम लोन पर प्रीपेमेंट/फोरक्लोज़र शुल्क आमतौर पर नहीं लगता। यानी अधिकांश होम लोन ग्राहक बिना जुर्माने के जितनी बार चाहें प्रीपेमेंट कर सकते हैं। फिक्स्ड-रेट लोन पर 2–4% तक शुल्क हो सकता है — इसलिए अपने लोन का प्रकार ज़रूर जाँच लें।

SBI, HDFC, ICICI, Axis जैसे बड़े लेंडर नेट बैंकिंग या ऐप से पार्ट-प्रीपेमेंट की सुविधा देते हैं। शर्तें (न्यूनतम राशि, कितनी बार, EMI या अवधि) बैंक और लोन के अनुसार बदल सकती हैं, इसलिए अंतिम पुष्टि हमेशा अपने बैंक से करें।

सवाल-जवाब

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

होम लोन प्रीपेमेंट क्या है?

प्रीपेमेंट यानी अपनी नियमित EMI के अलावा मूलधन में अतिरिक्त रकम जमा करना। इससे बकाया घटता है, और आप या तो EMI घटा सकते हैं या लोन की अवधि।

EMI घटाना बेहतर है या अवधि घटाना?

अगर कुल ब्याज बचाना लक्ष्य है तो अवधि घटाना आमतौर पर ज़्यादा बचाता है। अगर मासिक खर्च में राहत चाहिए तो EMI घटाएं। कैलकुलेटर दोनों नतीजे दिखाता है।

क्या प्रीपेमेंट पर शुल्क लगता है?

RBI नियमों के तहत फ्लोटिंग-रेट होम लोन पर आमतौर पर कोई शुल्क नहीं। फिक्स्ड-रेट लोन पर 2–4% तक हो सकता है। अपने लोन का प्रकार जाँचें।

क्या प्रीपेमेंट से ब्याज दर बदलती है?

नहीं। प्रीपेमेंट से केवल बकाया घटता है; ब्याज दर वही रहती है। दर बदलनी हो तो बैलेंस ट्रांसफर/रीफाइनेंस देखें।

क्या मैं कई बार प्रीपेमेंट कर सकता/सकती हूँ?

ज़्यादातर लोन में हाँ। न्यूनतम राशि और कितनी बार — यह बैंक पर निर्भर करता है, इसलिए शर्तें जाँच लें।

प्रीपेमेंट कब सबसे फ़ायदेमंद है?

जितनी जल्दी उतना बेहतर। लोन के शुरुआती वर्षों में EMI का बड़ा हिस्सा ब्याज होता है, इसलिए शुरुआती प्रीपेमेंट सबसे ज़्यादा ब्याज बचाता है।

प्रीपेमेंट करूँ या SIP/निवेश करूँ?

यह आपकी ब्याज दर बनाम अपेक्षित रिटर्न पर निर्भर करता है। प्रीपेमेंट एक निश्चित बचत है; निवेश में जोखिम और संभावित ज़्यादा रिटर्न दोनों हैं। आपातकालीन फंड पहले सुरक्षित रखें।

प्रीपेमेंट के बाद EMI कब बदलेगी?

आमतौर पर अगले एक-दो बिलिंग साइकल में। अपने अगले स्टेटमेंट में पुष्टि करें कि रकम मूलधन में लगी और नई EMI/अवधि लागू हुई।

क्या यह आँकड़ा मेरे बैंक जैसा ही होगा?

बहुत करीब। छोटा अंतर राउंडिंग, शुल्क और जमा होने की तारीख़ से आ सकता है। आधिकारिक आँकड़ा बैंक से लें।

क्या मेरी जानकारी सेव होती है?

नहीं। पूरी गणना आपके ब्राउज़र में होती है। आप जो भरते हैं वह किसी सर्वर पर नहीं भेजा जाता।