बड़ा फ़ैसला

EMI घटाएं या अवधि घटाएं?

प्रीपेमेंट करते ही बैंक दो रास्ते देता है। दोनों में ब्याज बचता है, पर एक जेब को हर महीने राहत देता है और दूसरा कुल मिलाकर सबसे ज़्यादा पैसा बचाता है। यहाँ साफ़-साफ़ समझिए कौन-सा आपके लिए सही है।

सीधा जवाब पहले: अगर आप मौजूदा EMI आराम से भर पा रहे हैं और लक्ष्य कुल ब्याज घटाना है, तो अवधि घटाना लगभग हमेशा ज़्यादा बचाता है। कारण सरल है — EMI वही रहती है, इसलिए हर किस्त में मूलधन का हिस्सा बड़ा होता जाता है और लोन जल्दी बंद होता है, जिससे बैंक को ब्याज लगाने के लिए कम महीने मिलते हैं।

लेकिन ज़िंदगी सीधी रेखा में नहीं चलती। नौकरी बदल रही हो, घर में नया सदस्य आया हो, या कोई बड़ा ख़र्च सिर पर हो — तब EMI घटाना राहत देता है। कुल बचत थोड़ी कम रहेगी, पर हर महीने की नकदी बढ़ जाएगी, जिसे आप आपात-कोष या SIP में लगा सकते हैं।

एक उदाहरण से समझें

मान लीजिए ₹50 लाख का लोन, 8.5% ब्याज, 20 साल बाकी, और आप ₹5 लाख प्रीपे करते हैं:

विकल्पEMIअवधिब्याज बचत
कुछ न करें₹43,39120 साल
EMI घटाएं₹39,05220 साल≈ ₹5.4 लाख
अवधि घटाएं₹43,391≈ 15 साल 8 माह≈ ₹17.6 लाख

फ़र्क़ साफ़ है: यही ₹5 लाख अवधि घटाने में लगाएं तो लगभग ₹17.6 लाख ब्याज बचता है, जबकि EMI घटाने में ₹5.4 लाख — पर बदले में हर महीने ₹4,339 की राहत मिलती है। न कोई "सही", न कोई "ग़लत" — बस आपकी प्राथमिकता।

ध्यान दें: कई भारतीय बैंक डिफ़ॉल्ट रूप से अवधि घटाते हैं। EMI घटवानी हो तो स्पष्ट रूप से कहना पड़ता है।

किसे क्या चुनना चाहिए

  • अवधि घटाएं — अगर EMI का बोझ ठीक है और आप जल्दी क़र्ज़-मुक्त होकर अधिकतम ब्याज बचाना चाहते हैं।
  • EMI घटाएं — अगर मासिक नकदी ज़रूरी है, या बची रकम को बेहतर रिटर्न वाले निवेश में लगाना चाहते हैं।

अपने आँकड़ों पर देखें

दोनों नतीजे साथ-साथ, आपकी असली रकम पर।

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सवाल-जवाब

आम सवाल

क्या अवधि घटाना हमेशा बेहतर है?

कुल ब्याज बचत के लिहाज़ से आमतौर पर हाँ। पर अगर मासिक नकदी की ज़रूरत है तो EMI घटाना बेहतर हो सकता है।

क्या मैं बाद में विकल्प बदल सकता/सकती हूँ?

हर प्रीपेमेंट पर बैंक फिर से विकल्प देता है, इसलिए आप अलग-अलग समय पर अलग चुन सकते हैं। शर्तें बैंक पर निर्भर।

शुरुआती सालों में प्रीपेमेंट ज़्यादा क्यों बचाता है?

क्योंकि शुरुआत में EMI का बड़ा हिस्सा ब्याज होता है; जल्दी मूलधन घटाने से आगे का ब्याज बड़े आधार पर घटता है।

प्रीपेमेंट करूँ या निवेश?

अगर निवेश का अपेक्षित रिटर्न आपकी ब्याज दर से ज़्यादा है तो निवेश आकर्षक है, पर उसमें जोखिम है। प्रीपेमेंट निश्चित बचत देता है।